अनुसूचित जनजाति की आर्थिक स्थिति का समीक्षात्मक अध्ययन (पन्ना जिले के विशेष संदर्भ में)
बिहारी लाल पटेल1, सी0 एल0 प्रजापति2
1शोध छात्र, अर्थशास्त्र अध्ययनशाला एवं शोध केन्द्र महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, छतरपुर, म0प्र0, भारत ।
2सह-प्राध्यापक, अर्थशास्त्र अध्ययनशाला एवं शोध केन्द्र महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय,
छतरपुर, म0प्र0, भारत ।
*Corresponding Author E-mail: biharilalpatelchp@gmail.com
ABSTRACT:
भारत की अनुसूचित जनजातियाँ आर्थिक एवं सामाजिक दोनों स्तरों पर ऐतिहासिक रूप से उपेक्षित समुदायों में आती हैं। मध्यप्रदेश की जनजातीय आबादी का बड़ा हिस्सा आज भी गरीबी, सीमित आय-स्रोत, अपर्याप्त शिक्षा, स्वास्थ्य-सुविधाओं की कमी और संसाधनों पर सीमित अधिकार जैसी चुनौतियों से घिरा हुआ है। पन्ना जिला जनजातीय-प्रभावित जिलों में से एक है, जहाँ विशेषतः गोंड, कोल, बैगा आदि समुदायों की उपस्थिति उल्लेखनीय है। प्रस्तुत शोध-पत्र में पन्ना जिले की अनुसूचित जनजातियों की आर्थिक स्थिति का आय, रोजगार, भूमि-स्वामित्व, आजीविका-विविधता, सरकारी योजनाओं की पहुँच, और सामाजिक-आर्थिक अवसंरचना के संदर्भ में समीक्षात्मक विश्लेषण किया गया है। अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि यद्यपि सरकारी योजनाओं और सामाजिक-विकास कार्यक्रमों के विस्तार से सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं, फिर भी गरीबी, अल्पभूमि-स्वामित्वए शिक्षा-असमानता और रोजगार-असुरक्षा जैसी समस्याएँ कायम हैं। हैं।
KEYWORDS: अनुसूचित जनजातियाँ, पन्ना, आर्थिक स्थिति, मध्यप्रदेश
1. INTRODUCTION:
यद्यपि सरकार द्वारा अनेक आर्थिक एवं सामाजिक योजनाएँ लागू की गई हैं, परंतु वास्तविक आर्थिक प्रगति का स्तर जनजातियों में समान रूप से नहीं पहुँच पाया है। इस शोध का उद्देश्य पन्ना जिले की जनजातियों की आर्थिक स्थिति की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करना है। मध्यप्रदेश, जिसकी 21% आबादी जनजातियाँ हैं (Census 2011), देश के जनजातीय राज्यों में से एक प्रमुख राज्य है। पन्ना जिला अपनी प्राकृतिक संपदा, हीरा-खनन, वनों और जनजातीय सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहाँ जनजातीय आबादी लगभग 16-17% के आसपास है (District Census Handbook, Panna, 2011)।
यह अध्ययन पन्ना जिले के जनजातीय समुदायों की आर्थिक स्थिति को सामाजिक-आर्थिक संकेतकों एवं सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता के आधार पर समीक्षात्मक पद्धति से प्रस्तुत करता है।
2. अध्ययन क्षेत्र का परिचय: पन्ना जिला-
2.1 भौगोलिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमि:
पन्ना जिला बुंदेलखंड क्षेत्र का हिस्सा है, जो भौगोलिक रूप से शुष्क एवं वर्षा-असमानता वाला क्षेत्र है। इस जिले का कुछ हिस्सा घने वन क्षेत्रों से आच्छादित है, जहाँ जनजातीय आबादी प्रायः प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर जीवन व्यतीत करती है।
2.2 जनजातीय समुदाय:
जिले में मुख्य रूप से गोंड, भील, बैगा, कोल, राजगोंड, भारिया और मसाई जनजातियाँ की उपस्थिति पाई जाती है। इनमें गोंड और कोल सामाजिक-आर्थिक रूप से सर्वाधिक निर्भर समुदाय हैं। जिला अधिकतर ग्रामीण प्रकृति का है; कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजातियों का महत्वपूर्ण अनुपात है। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में अनुसूचित जनजातियों की कुल जनसंख्या 170,879 है। यह जिले की कुल जनसंख्या का लगभग 16.8% है। census 2011 के अनुसार पन्ना जिले के आठ Block के अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या तालिका में दी गई है।
सारणी 1: अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या - 2011
|
विकासखंड |
अनुसूचित जनजाति 2011 |
कुल जनसंख्या से प्रतिशत |
|
अजयगढ़ |
15922 |
9.34 |
|
पन्ना |
47775 |
27.95 |
|
गुनौर |
23441 |
13.71 |
|
पवई |
28209 |
16.50 |
|
शाहनगर |
55532 |
32.49 |
|
जिला कुल |
170879 |
16.81 |
स्रोत : भारत की जनगणना, 2011
2.3 आर्थिक परिस्थितियाँ (सामान्य दृष्टि):
पन्ना जिला भारत सरकार द्वारा 2006 में घोषित सबसे पिछड़े जिलों में आता है। जिला बुंदेलखंड के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है, जहाँ भूमि की जलधारण क्षमता कम है। अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि, हीरा खनन, वन-उत्पादए पशुपालन और पर्यटन पर आधारित है। यहाँ गरीबी, बेरोजगारी, कम शैक्षिक स्तर और स्वास्थ्य-अवसंरचना की कमी प्रमुख समस्याएँ हैं।
साहित्य समीक्षा:
विद्वानों ने अनुसूचित जनजातियों की आर्थिक स्थिति पर विविध दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं-
· Xaxa (2003) के अनुसार जनजातीय समुदायों की आर्थिक समस्याएँ केवल गरीबी नहीं, बल्कि मुख्यधारा की विकास-नीतियों से असमान सहभागिता का परिणाम हैं।
· Bose (2007) का मत है कि जनजातीय अर्थव्यवस्था भूमि एवं वनों से जुड़े संसाधनों पर आधारित होती हैए अतः संसाधन-वंचना उनके आर्थिक हाशिये-करण की मुख्य वजह है।
· मध्यप्रदेश पर किए गए अध्ययनों (Sharma 2014; Verma 2017) में जनजातियों की शिक्षा-असमानता, सीमित रोजगार अवसर, वनोपज पर अत्यधिक निर्भरता और योजनाओं के अपर्याप्त क्रियान्वयन को प्रमुख बाधाएँ बताया गया है।
पन्ना जिले पर उपलब्ध अध्ययनों की संख्या सीमित हैए इसलिए यह शोध–कार्य क्षेत्रीय अध्ययन की आवश्यकता को पूरा करता है।
4. शोध-पद्धति:
4.1 डेटा-संग्रह: अध्ययन में दो प्रकार के डेटा उपयोग किए गए-
· द्वितीयक डेटा: जनगणना 2011, जिला सांख्यिकी पुस्तिका, सामाजिक-आर्थिक सर्वे, सरकारी रिपोर्टें, शोध-पत्र, NSSO रिपोर्ट।
· प्राथमिक संकेतक: उपलब्ध जिला-स्तरीय सर्वेक्षण, पिछली शोध रिपोर्टों के तुलनात्मक आँकड़े, एवं जनजातीय आजीविका-विषयक क्षेत्रीय अध्ययनों के निष्कर्ष।
4.2 अध्ययन के प्रमुख संकेतक:
1. आय स्तर
2. रोजगार पैटर्न
3. कृषि एवं भूमि-स्वामित्व
4. शिक्षा एवं स्वास्थ्य
5. सरकारी योजनाओं की पहुँच
6. संसाधनों पर अधिकार
7. सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ
5. पन्ना जिले में अनुसूचित जनजातियों की आर्थिक स्थिति-विश्लेषण:
पन्ना जिले में अनुसूचित जनजातियाँ-मुख्यतः कोल, भारिया, गोंड-ग्रामीण/वन क्षेत्रों में निवास करती हैं। उनका आर्थिक ढाँचा मुख्यतः प्राकृतिक संसाधनों, कृषि, मजदूरी और वनोपज पर आधारित है। सामाजिक-आर्थिक बाधाओं के कारण इन समुदायों का आर्थिक स्थिति-विश्लेषण निम्न है।
5.1 आय-स्रोत एवं आय-स्तर: पन्ना जिले की अधिकांश जनजातियाँ बहु-स्रोत आजीविका प्रणाली पर निर्भर हैं। प्रमुख स्रोत-
· कृषि एवं पशुपालन
· मजदूरी (दैनिक/मौसमी)
· वनोपज (Tendu Leaves, Mahua, Chironji, Charcoal)
· खनन-क्षेत्र की मजदूरी (कुछ क्षेत्रों में)
NSSO (2011-12) के अनुसार ग्रामीण जनजातियों की औसत आय, अन्य सामाजिक समूहों की तुलना में 20-30% कम पाई गई। पन्ना में स्थिति इससे भी कमजोर दिखाई देती है, क्योंकि-
· भूमि-स्वामित्व सीमित है,
· कृषि वर्षा-निर्भर है,
· रोजगार के वैकल्पिक अवसर कम हैं।
5.2 कृषि एवं भूमि-स्वामित्व: जनजातियों के भूमि-स्वामित्व से जुड़े निष्कर्ष-
· बहुत कम परिवारों के पास सुरक्षित/पक्के भूमि-दस्तावेज हैं।
· कई परिवार वनाधिकार (FRA 2006) के अंतर्गत पात्र हैं किंतु दावों का समाधान धीमा है।
· सिंचाई-सुविधाएँ कमजोर हैं, जिससे कृषि उत्पादन कम है।
भूमिहीनता मजदूरी-निर्भरता बढ़ाती है, जिससे आय-अस्थिरता बनी रहती है।
5.3 रोजगार संरचना: अध्ययन में जनजातियों के रोजगार-पैटर्न की प्रमुख विशेषताएँ-
1. 60–70% लोग कृषि-आधारित या कृषि-मजदूरी पर निर्भर।
2. मनरेगा आर्थिक सहारा प्रदान करती है, पर वर्ष-भर रोजगार उपलब्ध नहीं होता।
3. महिला-श्रम भागीदारी अधिक है, किंतु आय कम।
4. खनन-क्षेत्र में असंगठित मजदूरी का जोखिम अधिक है (सुरक्षा-उपकरण, स्वास्थ्य)।
5. युवा वर्ग कौशल प्रशिक्षण से वंचित है, जिससे गैर-कृषि रोजगार बहुत कम।
5.4 शिक्षा एवं स्वास्थ्य की आर्थिक भूमिका:
शिक्षा:
· जनजातीय साक्षरता दर जिले की औसत साक्षरता से 20-25% कम है।
· लड़कियों में साक्षरता अंतर अधिक है।
· प्राथमिक स्कूलों की उपलब्धता है, पर माध्यमिक स्तर तक पहुँच सीमित है।
· शिक्षा में कमी का सीधा प्रभाव-कम आय-अवसर, सीमित कौशल, कम आर्थिक गतिशीलता।
स्वास्थ्य:
· स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में कमजोर है।
· कुपोषण, एनीमिया, तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य समस्याएँ आर्थिक उत्पादकता को प्रभावित करती हैं।
· आय में अस्थिरता के कारण स्वास्थ्य-खर्च बोझ बन जाता है।
5.5 वनोपज एवं प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता: वनोपज पन्ना की जनजातियों की आर्थिक रीढ़ है-
· महुआ, तेंदूपत्ता, हर्रा, चिरौंजी आदि प्रमुख उत्पाद।
· इनके संग्रह पर महिला-श्रम प्रमुख रूप से निर्भर है।
· बाजार तक पहुँच सीमित होने से जनजातियों को वास्तविक मूल्य नहीं मिल पाता।
· वन-अधिकार का समाधान होने पर आय-सुधार की संभावना अधिक है।
5.6 सरकारी योजनाओं की पहुँच एवं प्रभाव: पन्ना जिले में निम्न योजनाएँ अर्थ-सुधार में प्रभावी मानी जाती हैं-
· प्रधानमंत्री वन-धन विकास योजना (Van Dhan Vikas Kendra)
· मनरेगा
· एकीकृत जनजातीय विकास परियोजना (ITDP)
· PM-JANMAN, EMRS, PESA क्षेत्रों में विशेष सहायता
· कौशल-विकास कार्यक्रम
· उज्ज्वला, आवास योजना, राशन कार्ड, PM-KISAN
6. प्रमुख निष्कर्ष:
· योजनाओं की पहुँच बढ़ी हैए पर लाभ-प्राप्ति में असमानता है।
· कई परिवार दस्तावेज़ीकरण, बैंकिंग, डिजिटल-साक्षरता की कमी से वंचित रहते हैं।
· आर्थिक सशक्तीकरण में योजनाएँ प्रभावी हैं, पर सतत् आजीविका बनने में समय लगेगा।
7. प्रमुख समस्याएँ:
1. भूमिहीनता एवं सीमित कृषि उत्पादन
2. मौसमी मजदूरी पर निर्भरता
3. शिक्षा-स्वास्थ्य की कमजोर स्थिति
4. वन-अधिकार का अधूरा क्रियान्वयन
5. बाजार-असमानताकृवनोपज का वास्तविक मूल्य नहीं मिलता
6. कौशल-विकास की सीमित उपलब्धता
7. सामाजिक-आर्थिक बहिष्करण एवं असमानता
8. भौगोलिक दूरीकृदूरस्थ जनजातीय बस्तियाँ सेवाओं से दूर
8. सुझाव:
1. भूमि एवं वन-अधिकार का त्वरित समाधान किया जाए।
2. वनोपज मूल्य-श्रृंखला (Value Chain) सुधार, भंडारण, प्रसंस्करण, स्थानीय विपणन केंद्र।
3. कौशल-विकास केंद्र खोलना, विशेषकर युवा एवं महिलाओं के लिए।
4. शिक्षा का सुदृढ़ीकरण, आवासीय स्कूल, परिवहनए, छात्रवृत्ति।
5. स्वास्थ्य-अवसंरचना का विस्तार, मोबाइल हेल्थ यूनिट, विशेष पोषण अभियान।
6. मनरेगा में 150-200 दिन रोजगार उपलब्ध करवाना।
7. स्व-सहायता समूह (SHGs) और वन-धन समूहों को आर्थिक सहायता एवं प्रशिक्षण।
8. डिजिटल-वित्तीय समावेशन, बैंकिंग मित्र, मोबाइल बैंकिंग, आधार-लिंक सेवाएँ।
9. निष्कर्ष:
पन्ना जिले की अनुसूचित जनजातियों की आर्थिक स्थिति बहु-आयामी चुनौतियों से घिरी हुई है, कम आय, सीमित भूमि-स्वामित्व, शिक्षा-स्वास्थ्य की कमजोर स्थिति, और वनोपज-निर्भरता। हालांकि, पिछले दशक में सरकारी योजनाओं एवं विकास परियोजनाओं के विस्तार से सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं। फिर भी, सतत् विकास और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए संसाधन-अधिकार, शिक्षा-स्वास्थ्य सुधार, कौशल-विकास और वनोपज मूल्य-वृद्धि जैसे क्षेत्रों में ठोस प्रयास आवश्यक हैं।
यह शोध-पत्र स्पष्ट करता है कि यदि नीतियों का क्रियान्वयन पारदर्शी, सहभागी एवं समुदाय-आधारित हो, तो पन्ना जिले की अनुसूचित जनजातियाँ आर्थिक प्रगति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकती हैं।
सन्दर्भ (References):
1. Census of India (2011). District Census Handbook: Panna.
2. Xaxa, Virginius (2003). Tribes in India: Development, Exclusion and Inclusion.
3. Sharma, R. (2014). Socio-Economic Status of Tribals in Madhya Pradesh.
4. Verma, M. (2017). Livelihood Patterns among Scheduled Tribes: A Study in Central India.
5. NSSO (2011–12). Consumption and Employment Survey.
6. Ministry of Tribal Affairs (2021). Tribal Development Report.
7. Government of Madhya Pradesh (2018). Tribal Welfare Department Report.
8. Bose, N. (2007). Tribal Economy and Sustainable Development.
|
Received on 22.11.2025 Revised on 19.12.2025 Accepted on 12.01.2026 Published on 20.03.2026 Available online from March 23, 2026 Int. J. of Reviews and Res. in Social Sci. 2026; 14(1):64-68. DOI: 10.52711/2454-2687.2026.00011 ©A and V Publications All right reserved
|
|
|
This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License. Creative Commons License. |
|